अहमदाबाद में बढ़ता वायु प्रदूषण, अक्टूबर में AQI 150 के पार; सर्दियों से पहले बढ़ी चिंता

अहमदाबाद में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ रही है। अक्टूबर 2026 में शहर के कुछ इलाकों में AQI 150 के पार पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। सड़क की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरे के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जानिए शहर की मौजूदा हवा की स्थिति, प्रदूषण के कारण और इससे बचने के जरूरी उपाय।

अहमदाबाद की हवा में बढ़ा प्रदूषण, अक्टूबर में कई इलाकों का AQI 150 के पार

अहमदाबाद में वायु प्रदूषण एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। सर्दियों की शुरुआत से पहले शहर के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। अक्टूबर 2026 के दौरान अहमदाबाद का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कुछ समय पर 150 के पार पहुंच गया था। इससे शहर में रहने वाले लोगों, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

2 नवंबर 2026 की स्थिति भी अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर अलग-अलग तस्वीर दिखाती है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के अहमदाबाद एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, दोपहर 3 बजे राइखड़ स्टेशन पर AQI 155, एयरपोर्ट पर 142, चांदखेड़ा में 116 और रखियाल में 97 दर्ज किया गया। वहीं बोपल के एक मॉनिटरिंग स्टेशन पर यह 49 था। इससे साफ है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता एक जैसी नहीं है।

 

अक्टूबर में बढ़ा था प्रदूषण

19 अक्टूबर को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया था कि रात करीब 10 बजे अहमदाबाद का औसत AQI 252 तक पहुंच गया था। कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर इससे भी अधिक बताया गया। रिपोर्ट में PM10 कणों को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया था।

गुजरात समाचार की 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले दस महीनों में शहर में एक भी दिन हवा की गुणवत्ता 'अच्छी' श्रेणी में दर्ज नहीं हुई। हालांकि, रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए मूल आंकड़ों और मॉनिटरिंग पद्धति का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस दावे को रिपोर्ट के हवाले से ही देखा जाना चाहिए।

 

अहमदाबाद में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण

शहर में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण स्थलों से निकलने वाले कण, वाहनों का धुआं और औद्योगिक इकाइयों से होने वाला उत्सर्जन हवा को प्रभावित कर सकते हैं।

मानसून के बाद सड़कों पर जमा मिट्टी और धूल भी वाहनों की आवाजाही के साथ हवा में फैलती है। इसके अलावा, निर्माण कार्यों के दौरान धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त उपाय न किए जाने पर आसपास के इलाकों में प्रदूषण बढ़ सकता है। पिराना डंपिंग साइट पर जमा कचरे को लेकर भी पर्यावरण संबंधी चिंताएं जताई गई हैं।

 

बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर असर

प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनके संपर्क में आने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा या दिल से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को प्रदूषण के दिनों में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

 

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

AQI अधिक होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम या दौड़ने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें। घर में खिड़कियां बंद रखने या वेंटिलेशन का सही समय चुनने के लिए स्थानीय AQI अपडेट देखें। बच्चों और बुजुर्गों को अधिक प्रदूषण वाले समय में बाहर की गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी जाती है।

शहर के नागरिक भी अपनी तरफ से योगदान दे सकते हैं। निजी वाहन का कम इस्तेमाल, कचरा न जलाना, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और पेड़-पौधों की देखभाल जैसे कदम मददगार हो सकते हैं।

 

प्रशासन के सामने प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती

अहमदाबाद में हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सड़क की धूल पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों की नियमित निगरानी, औद्योगिक उत्सर्जन की जांच और कचरा प्रबंधन पर लगातार काम करने की जरूरत है। प्रदूषण के आंकड़ों को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना और अलग-अलग इलाकों में निगरानी बढ़ाना भी जरूरी है।

 

निष्कर्ष

अहमदाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। अक्टूबर में AQI के ऊंचे स्तर और नवंबर की शुरुआत में अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर दर्ज आंकड़े बताते हैं कि शहर के कुछ इलाकों में हवा की गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है। सर्दियों के दौरान स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रशासन और नागरिकों दोनों को मिलकर कदम उठाने होंगे।